एक करोड़ का सवाल: बिहार की विदेशी छात्रवृत्ति किसके लिए?

9 अप्रैल 2026 · बिहार

बिहार के मंत्री लखेन्द्र पासवान ने हाल में एक बड़ी घोषणा की: राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के तहत अब SC/ST छात्रों को विदेश में पूरी तरह मुफ्त शिक्षा मिलेगी — चाहे खर्च करोड़ों में हो। सुनने में यह क्रांतिकारी लगता है। डॉ. आशुतोष सिंह का सवाल सीधा है: यह योजना वास्तव में किसके लिए बनी है?

घोषणा में क्या है?

सरकार का दावा है कि विदेश में पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य उठाएगा। यह SC/ST समुदाय के लिए समान अवसर की बात करता है। पर जब तक चयन, सीटें, देश, विषय और पात्रता सार्वजनिक न हों, तब तक ‘मुफ्त’ शब्द पर भरोसा करना मुश्किल है।

यह योजना वास्तव में किसके लिए है?

विदेश में पढ़ाई का खर्च अक्सर एक करोड़ रुपये से ऊपर चला जाता है। डॉ. सिंह पूछते हैं: क्या यह योजना गाँव के उस प्रतिभाशाली बच्चे के लिए है जिसके पास कोचिंग का पैसा नहीं, या फिर वहीं पहुँचेगी जहाँ पहले से संपर्क और सिफारिश मौजूद हैं? यदि वितरण अपारदर्शी रहा, तो ‘समाजिक न्याय’ के नाम पर यह एक और सीमित लाभ बन जाएगा।

जनता को क्या जानने का अधिकार है?

हर परिवार को यह जानना चाहिए: चयन कैसे होगा, कितनी सीटें हैं, कौन से देश और कौन से विषय शामिल हैं, और मेरिट मापदंड क्या हैं। घोषणा से पहले जवाबदेही — तालियों से पहले सवाल।

न्यायसंगत छात्रवृत्ति की शर्तें क्या हैं?

डॉ. सिंह का मानना है कि विदेशी शिक्षा की सब्सिडी तभी उचित है जब: (१) मेधा और आर्थिक ज़रूरत दोनों स्पष्ट हों, (२) चयन पूरी तरह सार्वजनिक हो, (३) लौटने के बाद राज्य को सेवा का रास्ता हो — अनुसंधान, शिक्षण, या जनहित की नीति। बिहार को सिर्फ ‘विदेश गए कुछ लोगों’ की सूची नहीं; ऐसे नागरिक चाहिए जो प्रणाली बदल सकें।